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पंजाब में अवैध रेत-बजरी पर शिकंजा, फर्जी GST बिलों की जांच

Kavita2
10 Aug 2026 10:12 AM IST
पंजाब में अवैध रेत-बजरी पर शिकंजा, फर्जी GST बिलों की जांच
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चंडीगढ़। पंजाब में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के बीच एक नया मामला सामने आया है। पंजाब माइनिंग डिपार्टमेंट ने स्वान और सतलुज नदियों से कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से निकाली गई रेत और बजरी को वैध दिखाने के लिए हिमाचल प्रदेश से लाए गए फर्जी GST बिलों के इस्तेमाल की जांच शुरू कर दी है। विभाग को आशंका है कि अवैध रूप से निकाली गई खनन सामग्री को कागजों में वैध बताने के लिए बिलिंग व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, गड़बड़ी की आशंका सामने आने के बाद पंजाब माइनिंग डिपार्टमेंट ने बिलिंग से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। अब खनन सामग्री की आवाजाही और उसके स्रोत से संबंधित दस्तावेजों की जांच पर अधिक जोर दिया जा रहा है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या हिमाचल प्रदेश से जारी किए गए बताए जा रहे GST बिल वास्तव में वैध हैं या उनका इस्तेमाल पंजाब में अवैध रूप से निकाली गई सामग्री को वैध साबित करने के लिए किया गया।

रोपड़ के वैध खनन कारोबारियों की शिकायत से खुला मामला

सूत्रों ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि यह मामला रोपड़ जिले में वैध माइनिंग साइट संचालित करने वाले कारोबारियों की शिकायतों के बाद सामने आया। इन कारोबारियों ने कथित तौर पर विभाग के सामने अपनी परेशानी रखी और आरोप लगाया कि अवैध रूप से निकाली गई रेत और बजरी कम कीमत पर बाजार में पहुंच रही है।

वैध खनन साइट संचालकों का कहना है कि अवैध सामग्री की कम कीमत के कारण उनके कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जहां नियमों का पालन करते हुए खनन करने वाले कारोबारियों को लाइसेंस, रॉयल्टी, पर्यावरण संबंधी शर्तों और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है, वहीं कथित अवैध खनन से जुड़ी सामग्री कम लागत पर बाजार में पहुंचने से प्रतिस्पर्धा असमान हो जाती है।

इसी शिकायत के बाद विभाग ने बिलिंग और खनन सामग्री की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

फर्जी GST बिलों के इस्तेमाल का शक

जांच का मुख्य बिंदु कथित तौर पर हिमाचल प्रदेश के GST बिल हैं। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या कुछ बिलों का इस्तेमाल ऐसी रेत और बजरी को वैध दिखाने के लिए किया गया, जो वास्तव में पंजाब की नदियों से गैर-कानूनी तरीके से निकाली गई थी।

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजों और बिलिंग व्यवस्था के कथित दुरुपयोग का मामला भी बन सकता है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ वैध खनन कारोबारियों के लिए भी गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक समस्या पैदा होती है।

हालांकि, फिलहाल जांच शुरुआती स्तर पर है और फर्जी बिलों के इस्तेमाल के आरोपों की अंतिम पुष्टि होना बाकी है। विभाग रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा।

बिलिंग प्रक्रिया हुई सख्त

सूत्रों के मुताबिक, गड़बड़ी की आशंका सामने आने के बाद माइनिंग डिपार्टमेंट ने बिलिंग प्रक्रिया को सख्त करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में पहुंचने वाली रेत और बजरी का स्रोत स्पष्ट हो और उसके लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक हों।

अब खनन सामग्री से संबंधित बिलों की जांच के दौरान उसके स्रोत, मात्रा, परिवहन और संबंधित माइनिंग साइट से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। इस तरह की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी सामग्री को कागजों पर दूसरे स्थान से आया हुआ तो नहीं दिखाया गया।

अवैध खनन से वैध कारोबारियों को नुकसान

रोपड़ जिले के वैध माइनिंग साइट संचालकों की शिकायत इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कारोबारियों का आरोप है कि अवैध तरीके से निकाली गई सामग्री बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध होने से उन्हें अपनी सामग्री बेचने में मुश्किल हो रही है।

वैध खनन कारोबार में विभिन्न तरह के शुल्क और नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके मुकाबले यदि अवैध रूप से निकाली गई रेत और बजरी बाजार में बिना समान लागत के पहुंचती है तो कीमतों में अंतर स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है। यही वजह है कि वैध खनन कारोबारियों ने विभाग से कार्रवाई और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है असर

अवैध खनन से केवल पर्यावरण और नदी तंत्र को नुकसान का खतरा नहीं रहता, बल्कि सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी असर पड़ सकता है। जब खनन सामग्री बिना वैध अनुमति और निर्धारित शुल्क के निकाली जाती है तो सरकारी खजाने को रॉयल्टी और अन्य शुल्क के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है।

यदि अवैध सामग्री को फर्जी दस्तावेजों के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की गई है तो इससे निगरानी व्यवस्था के सामने भी चुनौती पैदा होती है। ऐसे में विभाग की जांच का दायरा केवल खनन स्थल तक सीमित नहीं रहकर बिलिंग और परिवहन से जुड़े नेटवर्क तक पहुंच सकता है।

जांच के बाद तस्वीर होगी साफ

फिलहाल पंजाब माइनिंग डिपार्टमेंट ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की ओर से बिलिंग से संबंधित रिकॉर्ड की जांच और संभावित गड़बड़ियों की पड़ताल की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कितने बिल संदिग्ध हैं, कितनी खनन सामग्री से उनका संबंध है और कथित तौर पर इसमें कितने लोग या कारोबारी शामिल हैं।

यदि दस्तावेजों की जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो विभाग की जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल स्वान और सतलुज नदियों से कथित अवैध खनन तथा हिमाचल प्रदेश के फर्जी GST बिलों के इस्तेमाल को लेकर शुरू हुई जांच ने पंजाब में रेत-बजरी के कारोबार पर निगरानी का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। वैध खनन कारोबारियों की शिकायत के बाद विभाग द्वारा बिलिंग नियमों को सख्त करना इस बात का संकेत है कि सरकार अवैध खनन से जुड़ी संभावित गड़बड़ियों पर नजर बनाए हुए है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी बिलों के जरिए अवैध सामग्री को वैध दिखाने का कितना बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।

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